राज्य आन्दोलनकारी भावना पांडे ने कहा- उत्तराखंड आज बुरे दौर से गुजर रहा है

देहरादून। उत्तराखंड की बेटी, वरिष्ठ राज्य आन्दोलनकारी एवं प्रसिद्ध समाजसेवी भावना पांडे ने उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति एवं प्रदेश की भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा, उत्तराखंड आज बुरे दौर से गुजर रहा है। बीजेपी के राज में इस प्रदेश की दुर्दशा हुई है। भाजपा से त्रस्त राज्य की जनता आज सड़कों पर आकर भाजपा सरकार से सवाल पूछ रही है किन्तु गहरी निंद्रा में सोई सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

राज्य आन्दोलनकारी भावना पांडे ने कहा, अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एक बार फिर से इस राज्य में सियासी तूफान ला दिया है। वहीं भाजपा सरकार इस मामले को दबाने और अपने चहेते नेताओं को बचाने के लिए ऐड़ीचोटी का जोर लगा रही है। जनता की आवाज को दबाया जा रहा है और अंकिता हत्याकांड में शामिल वीआईपी गेस्ट के नाम को छुपाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी के नेताओं का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है तो, आखिर सरकार इस पूरे प्रकरण की सीबीआई से निष्पक्ष जांच क्यों नहीं करवा रही, सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। भाजपा सरकार को आखिर किस बात का डर है, आखिर क्यों पीड़ित परिवार को न्याय नहीं दिया जा रहा? आज पूरे प्रदेश से बस एक ही आवाज उठ रही है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिया जाए मगर सरकार मौन है।

भावना पांडे ने कहा कि बीजेपी के कार्यकाल के दौरान बीते कुछ वर्षों में महिलाओं के विरूद्ध हो रहे अपराधों के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। हमारी बहन-बेटियां आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं, वाकई ये बेहद चिंता का विषय है। बीजेपी के राज में भ्रष्टाचार, अपराध और माफियाराज बढ़ा है, जो आम जनता के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बना हुआ है। वहीं राज्य में धड़ल्ले से बार, क्लब, होम स्टे और स्पा सेंटर जैसे स्थल खोले जा रहे हैं। इन जगहों पर लगभग रोजाना ही कोई ना कोई आपराधिक वारदात घटित होती है और रोजाना ही ये अपराध के अड़डे सुर्खियों में छाये रहते हैं। उन्होंने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि देवभूमि में इस प्रकार के कल्चर को क्यों बढ़ावा दिया जा रहा है, आखिर सरकार ऐसी चीजों के चलन पर रोक क्यों नहीं लगा रही है? देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियां आज अपराधों के शोर से गूंज रही हैं और इसकी जिम्मेदार सिर्फ प्रदेश की भाजपा सरकार ही है।

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